सचिन पायलट कांग्रेस के युवा नेताओ में से एक थे. वे राजस्थान के वर्तमान सरकार में मुख्यमंत्री और राजस्थान प्रदेश-अध्यछ के रूप में कार्यरत थें. फ़िलहाल उनके बागी होने के अटकलों के चलते और आज राजस्थान में विधायक दल की बैठक में शामिल न होने के चलते दोनों पदों से हटा दिया गया है.

बता दें की सचिन पायलट ने 2003 में कांग्रेस पार्टी का दामन थमा था. और उसके अगले ही साल वे संसद बन गये. पायलट ३२ साल की उम्र में केंद्रीय मंत्री बन गये और ४० की उम्र में उपमुख्यमंत्री. इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि साफ़ जाहिर करता है कि उनके ऊपर हमेशा कांग्रेस हाई कमान का हाथ रहा.

फिर भी सत्ता और पॉवर के लालच ने सचिन पायलट को कांग्रेस पार्टी छोड़ने के लिए विवश कर दिया. यह सीधे तौर पर राजस्थान के जनमानस का अपमान है.अगर सचिन पायलट अपनी खुद की पार्टी बनाते और जनता को एक बार फिर से अपना मैंडेट चुनने के लिए विकल्प देते तो यह माना जा सकता था कि पायलट सत्ता के लोभी नही हैं.

“सत्य परेसान हो सकता है पराजित नही” :सचिन पायलट

सत्य को परेसान किया जा सकत है, पराजित नही: सचिन पायलट

उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यछ पद से हटाये जाने के ठीक बाद सचिन पायलट ने एक लाइन में ट्वीट किया,”सत्य परेसान हो सकता है पराजित नही”.साथ में उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से कांग्रेस शब्द को हटा लिया है.

आपको बता दें की गहलोत सरकार का दावा है कि उनकी सरकार अल्पमत में नही है.उनके पास 107 विधायको का समर्थन है. मुख्यंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए कहा कि बगावत करने वाल्व सचिन पायलट के हाथ में कुछ भी नहीं है और वे केवल बीजेपी के हाथ में खेल रहे हैं.

बताया ये जा रहा है कि सचिन पायलट के समर्थन में केवल, 20 विधायक हैं, जो हरयाणा के किसी होटल में ठहरे हैं.ऐसे में पायलट अगर सरकार गिराने में नकाब हो जायेंगे तो वो न तो घर के रह जायेंगे न घाट के, उनका पूरा राजनितिक करियर दांव पर लगा है.

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