इस आर्टिकल में हम जानेंगे की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(NSA) क्या है, और इसके अंदर क्या प्रावधान है ?

NSA एक Preventive detention law (निवारक निरोध कानून) है। NSA(रासुका) राज्य और केंद्र सरकार को एक ऐसे व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार देता है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।इसके तहत सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने के लिए भी सरकार किसी भी व्यक्ति को हिरासत में भी ले सकती है। NSA के तहत, सरकार किसी भी आरोप के बिना किसी संदिग्ध को अधिकतम 12 महीने तक जेल में रख सकती है। लेकिन सरकार मामले में नए सबूत मिलने पर इस अवधि को बढ़ा भी सकती है।

NSA Act भारत में कब लागू किया गया ?

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), या रासुका, इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान 23 सितंबर 1980 में लागू किया गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 के तहत अगर सरकार को लगता है कि कोई भी व्यक्ति कानून व्यवस्था में बांधा पैदा कर रहा है, तो उसके खिलाफ NSA या रासुका लगाया जा सकता है। इसके अलावा अगर सरकार को लगे कि किसी जरूरी सेवा की आपूर्ति में कोई भी व्यक्ति बाधा डाल रहा है, तो उसके खिलाफ भी NSA(रासुका) लगाया जा सकता है।

आपको बता दें की आजाद भारत में निवारक निरोधक अधिनियम (Preventive Detention Act) 1950 में आया जिसे 31 दिसंबर, 1969 को लागू किया गया था। इसके बाद आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (Maintenance of Internal Security Act- MISA) सन 1971 में लागू हुआ, लेकिन जनता पार्टी के कार्यकाल के दौरान 1977 में इस कानून को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 1980 में एक बार फिर से इस कानून को इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान लागू किया गया।

भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के प्रावधान

सामान्य तौर पर यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे कुछ मूल अधिकारों की गारंटी दी जाती है। इनमें गिरफ्तारी के कारण के बारे में सूचित किए जाने का अधिकार शामिल है और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 50 के तहत जमानत का अधिकार है। सीआरपीसी के धारा 56 और 76 में यह भी प्रावधान है कि गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर एक व्यक्ति को अदालत में पेश किया जाना चाहिए। इसके अलावा संविधान का अनुच्छेद 22 (1) हिरासत में लिए गए व्यक्ति को वकील से कानूनी सलाह लेने की अनुमति देता है। लेकिन इनमें से कोई भी अधिकार NSA के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उपलब्ध नहीं है।

‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (National Crime Records Bureau- NCRB); जो देश में अपराध संबंधी आँकड़े एकत्रित तथा उनका विश्लेषण करता है, NSA के तहत आने वाले मामलों को अपने आँकड़ों में शामिल नहीं करता है क्योंकि इन मामलों में कोई FIR दर्ज नहीं की जाती है। अत: NSA के तहत किये गए निवारक निरोधों की सटीक संख्या के आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का उपयोग

दिल्ली में NSA (रासुका)

17 जनवरी, 2020 को, दिल्ली के उपराज्यपाल ने एक आदेश पारित किया जिसमें 19 जनवरी और 18 अप्रैल के बीच तीन महीने की अवधि के लिए एनएसए के तहत हिरासत में रखने की शक्ति वाला पुलिस आयुक्त था। यह आदेश ऐसे समय आया जब राष्ट्रीय राजधानी नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देख रही थी। दिल्ली में यह अधिसूचना राज्यपाल की मंजूरी के बाद 10 जनवरी को जारी की गई थी।

UP में NSA (रासुका)

जनवरी 2019 में, भाजपा के नेतृत्व वाले उत्तर प्रदेश ने एक कथित गौ-हत्या के मामले में एनएसए के तहत तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान दे रहे लोगों पर हुए हमलों के खिलाफ NSA (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *